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मध्य प्रदेश के जनलपुर स्थित मैदान महल हिल्स में एक दुर्लभ और विशालकाय मशरूम ‘Bondarzewia berkeleyi’ की खोज ने वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया है। आमतौर पर उत्तरी अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों में पाए जाने वाला यह मशरूम यहां मिलना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और अनुकूल पर्यावरण का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस मशरूम का आकार 50 से 100 सेंटीमीटर तक चौड़ा हो सकता है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े मशरूमों में शामिल करता है। यह पंखुड़ियों के गुच्छे की तरह उगता है और इसका रंग क्रीम, मटमैला या हल्का भूरा होता है। इसकी सतह पर बने संकेंद्रित छल्ले इसे अन्य जंगली मशरूमों से अलग पहचान देते हैं।
वनस्पति वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मशरूम मुख्य रूप से पुराने ओक पेड़ों की जड़ों या ठूंठ पर उगता है और शुरुआत में परजीवी की तरह पेड़ों में सड़न (बट रॉट) पैदा करता है। हालांकि, बाद में यह लकड़ी के अपघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए मिट्टी को पोषक तत्व लौटाने में मदद करता है। विशेषज्ञों ने बताया कि ताजा अवस्था में इसे खाया जा सकता है, लेकिन बिना सही पहचान के किसी भी जंगली मशरूम का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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