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मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा कराई गई सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर की हवा को खतरनाक स्तर तक प्रदूषित पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार इसका मुख्य कारण धूल, वाहन उत्सर्जन, कचरा जलाना और निर्माण कार्य से उड़ने वाले कण हैं। भोपाल में हर साल लगभग 10,309 टन पीएम-10 कण हवा में मिल रहे हैं।
इंदौर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्य, यातायात जाम और कचरे के अनुचित प्रबंधन से हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, सागर और देवास भी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों से पीछे हैं। इन शहरों में धूल, वाहन उत्सर्जन और कचरा जलाने की समस्या प्रमुख रूप से सामने आई है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है।
रिपोर्ट में प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों की मरम्मत, पुराने डीजल वाहनों पर रोक, कचरा जलाने पर सख्ती, निर्माण स्थलों पर सुरक्षा कवर और हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय सुझाए गए हैं। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वायु प्रदूषण की समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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