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देश भर में जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाली कंपनियों (Willful Defaulters) की टॉप-10 लिस्ट में मध्य प्रदेश की कई कंपनियां शामिल हैं। संसद में 2014 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, केवल एमपी की दो प्रमुख कंपनियों पर ही ₹8,34,919 लाख (करीब 8,349 करोड़ रुपए) का बकाया है। इन कंपनियों ने बैंकों से लिए गए वर्किंग कैपिटल और टर्म लोन का उपयोग व्यवसाय में न करके अन्य जगह डाइवर्ट करने का आरोप झेला।
बीटा नेफ्थोल खरगोन की प्रमुख कंपनी है, जिसका रजिस्टर्ड ऑफिस इंदौर में और फैक्ट्री बड़वाह में थी। इसे 2014 से विलफुल डिफॉल्टर की श्रेणी में रखा गया और बैंक ने संपत्तियां कुर्क कर परिसमापन की प्रक्रिया शुरू की। वहीं, गिल्ट पैक लिमिटेड धार के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की कंपनी है, जिस पर वित्तीय अनियमितताओं और जानबूझकर लोन न चुकाने के आरोप हैं। कंपनी और इसके निदेशकों पर SEBI ने पूंजी बाजार में प्रतिबंध लगाया, जबकि बैंक ने क्रेडिट सुविधा रोक दी और वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की।
मध्य प्रदेश की अन्य कंपनियों में एस कुमार्स (SKNL) और रूची सोया शामिल हैं। एस कुमार्स की उत्पादन इकाइयां खंडवा और देवास में थीं, लेकिन भारी कर्ज और फंड हेराफेरी के आरोपों के चलते बैंकों ने मिलों को कुर्क किया। रूची सोया इंदौर से शुरू हुई थी, लेकिन दिवालिया होकर पतंजलि आयुर्वेद द्वारा अधिग्रहीत की गई। इन कंपनियों की वजह से राज्य और देश के बैंकिंग क्षेत्र में अरबों रुपए का संकट पैदा हुआ है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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