Advertisement
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि दुनिया में युद्ध और संघर्षों की मुख्य वजह स्वार्थी हित और वर्चस्व की लालच है। उन्होंने बताया कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से संभव है। भागवत ने कहा कि भारत सद्भाव और मानवता में विश्वास रखने वाला देश है, इसलिए पूरी दुनिया देख रही है कि भारत ही ईरान-इजराइल युद्ध को शांत करने में मदद कर सकता है।
भागवत ने जोर दिया कि भारत में धर्म सिर्फ पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे व्यवहार में भी दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन लगातार अभ्यास मांगता है, और इसमें कभी-कभी व्यक्तिगत कठिनाइयां भी आती हैं। उनका मानना है कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच की भावनाएं आज भी मौजूद हैं, लेकिन भारत का प्राचीन ज्ञान हमें आपस में जुड़ाव और एकता सिखाता है।
RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत की मानवता और शांति की भावना दुनिया के अन्य हिस्सों के लिए उदाहरण है। उन्होंने बताया कि जबकि बाकी दुनिया अक्सर “जंगल का कानून” मानती है, भारत धर्म और नैतिकता की नींव देकर संतुलन बहाल कर सकता है। भागवत ने कहा कि यह जिम्मेदारी हम पर है कि हम दुनिया में स्थायी शांति और सद्भाव को कायम रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |