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देशभर में लेडी अघोरी माता के नाम से प्रसिद्ध महाकाली नंदगिरी को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया है। अघोर साधना के लिए चर्चित नंदगिरी लंबे समय से सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार से जुड़ी हुई हैं। बताया जाता है कि उन्होंने करीब 18 साल पहले कामाख्या मंदिर में तंत्र साधना सीखी और तब से अघोर साधना में सक्रिय हैं।
महाकाली नंदगिरी मूल रूप से मंचेरियल जिला के कुशनपल्ली क्षेत्र की रहने वाली हैं। बताया जाता है कि उन्होंने कम उम्र में ही घर छोड़कर साधना का मार्ग अपना लिया था। बाद में उन्होंनेकामाख्या मंदिर में अघोर साधना सीखी और धीरे-धीरे लेडी अघोरी माता के रूप में पहचान बनाई। सनातन परंपरा के प्रचार और गौ संरक्षण से जुड़े कार्यों के कारण भी वे चर्चा में रही हैं।
महामंडलेश्वर बनने के बाद महाकाली नंदगिरी ने कहा कि लोग अक्सर अघोरी शब्द का गलत अर्थ निकालते हैं। उनके अनुसार अघोरी का मतलब भयानक नहीं बल्कि निडर होता है। अघोर परंपरा में साधक भय से मुक्त होकर आध्यात्मिक जागृति और जीवन-मृत्यु के सत्य को समझने की साधना करता है। उन्होंने कहा कि वे आगे भी सनातन संस्कृति के संरक्षण और धार्मिक परंपराओं के प्रचार के लिए कार्य करती रहेंगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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