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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं के लिए पीरियड्स में पेड लीव देने की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर ऐसा कानून बनाया गया तो नियोक्ता महिलाओं को काम नहीं देंगे और उनका करियर प्रभावित होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बने रूढ़ियों को मजबूत कर सकती हैं।
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पेड पीरियड्स लीव लागू करने से सामाजिक और व्यावसायिक असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर प्राइवेट सेक्टर में हर महीने महिलाओं को छुट्टी दी जाएगी, तो नियोक्ता उन्हें जिम्मेदारी नहीं देंगे, यहां तक कि ज्यूडीशियल सर्विस में भी सामान्य मुकदमे नहीं सौंपे जाएंगे। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकरण से पहले दिए गए आदेशों के आधार पर नीति तैयार करने का निर्देश दिया।
देश में पेड मेंस्ट्रुअल लीव के लिए कोई राष्ट्रीय नीति नहीं है, लेकिन कुछ राज्यों और कंपनियों ने इसे लागू किया है। बिहार में 1992 से सरकारी महिला कर्मचारियों को महीने में 2 दिन की छुट्टी मिलती है। कर्नाटक 2025 में पहला राज्य बना, जहां सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में यह अनिवार्य है। केरल और ओडिशा में भी सरकारी महिला कर्मचारियों और छात्राओं को प्रतिमाह 1 दिन छुट्टी मिलती है। निजी कंपनियों जैसे Zomato, Swiggy और L&T में भी महिलाएं इस सुविधा का लाभ ले रही हैं।
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