सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं को दी नसीहत: देश में बढ़ाएं भाईचारे का संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजनीतिक भाषणों को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाने का काम करना चाहिए। कोर्ट ने शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा समेत 12 याचिकाकर्ताओं से राजनीतिक भाषणों पर दिशानिर्देश के लिए नई याचिका दाखिल करने को कहा। मौजूदा जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि देश का माहौल जहरीला होता जा रहा है और भाषणों में जवाबदेही तय करने के लिए नेताओं और मीडिया के लिए गाइडलाइन बनाई जानी चाहिए। याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कथित हेट स्पीच के संदर्भ में दायर की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मौजूदा याचिका किसी एक दल या नेता पर केंद्रित लग रही है, इसलिए इसे वापस लेकर एक नई निष्पक्ष याचिका दायर करें।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "राजनीतिक नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि गाइडलाइन बनाना आसान है, लेकिन उनका पालन कराना चुनौतीपूर्ण है। जस्टिस बागची ने जोड़ा कि हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई सिद्धांत तय कर चुका है और राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि नेता पार्टी का ही सदस्य होता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि नई याचिका में यह स्पष्ट किया जाए कि राजनीतिक दल संवैधानिक मूल्यों का पालन कैसे कर रहे हैं।