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मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन अब महाकाल मंदिर और महाकाल लोक के लिए ही नहीं, बल्कि अपने भव्य प्रवेश द्वारों के लिए भी प्रसिद्ध होने वाली है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) ने शहर के प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ रुपये की लागत से 9 प्रवेश द्वार बनाने का निर्णय लिया है। ये द्वार केवल शहर की सौंदर्यीकरण योजना का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उज्जैन की हजारों साल पुरानी सनातन परंपरा, खगोल-कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को भी दर्शाएंगे। योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ मार्ग समेत अन्य प्रमुख रास्तों पर ये द्वार बनाए जाएंगे।
इन प्रवेश द्वारों की डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य कला और आधुनिक इंजीनियरिंग का संयोजन होगी। निर्माण में गुलाबी-सफेद और पीले पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा, साथ ही द्वारों पर 3D नक्काशी में पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, हाथी, शेर और मानव आकृतियां उकेरी जाएँगी। रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबी-डब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी और सोलर सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बने रहेंगे।
इन 9 द्वारों के नाम और उनके बजट इस प्रकार हैं: अमृत द्वार (9.68 करोड़), पंचजन्य द्वार (12.50 करोड़), गज द्वार (8.51 करोड़), कालगणना द्वार (11.07 करोड़), उज्जैनी द्वार (6.48 करोड़), सिंहस्थ द्वार (6.48 करोड़), त्रिशूल द्वार (10.65 करोड़), विक्रमादित्य द्वार (13.58 करोड़) और डमरू द्वार (13.29 करोड़)। ये द्वार न केवल शहर की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक गौरव को दर्शाएंगे, बल्कि आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप सुरक्षा, सुगमता और सौंदर्य का भी संतुलन बनाएंगे।
Patrakar Vandana Singh
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