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पुणे जिला परिषद चुनावों में एनसीपी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। कुल 73 सीटों में से 55 सीटों के नतीजे सामने आने के बाद पार्टी ने 39 सीटें जीतकर सत्ता पर कब्जा जमा लिया। भाजपा को 8 सीटें, शिवसेना को 4 सीटें, शरद पवार गुट को 1 और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को 3 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों का खाता नहीं खुल सका। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी की जिम्मेदारी संभालने वाली सुनेत्रा पवार की पहली राजनीतिक परीक्षा सफल रही और जनता ने उनके नेतृत्व में एनसीपी को समर्थन दिया।
पंचायत समितियों के चुनावों में भी एनसीपी का प्रदर्शन मजबूत रहा। पार्टी 20 से अधिक पंचायत समितियों में आगे चल रही है और सीटों के लिहाज से भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बाद तीसरे स्थान पर है। खासकर बारामती, मावल, शिरूर, हवेली और जुन्नार जैसे क्षेत्रों में एनसीपी ने मजबूत बढ़त बनाए रखी। मावल तालुका में पार्टी सभी 5 जिला परिषद और 10 पंचायत समिति सीटों पर जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही है, जो दर्शाता है कि अजित पवार के निधन के बाद भी एनसीपी का राजनीतिक दबदबा कायम है।
राज्य में शनिवार को 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान हुआ, जिसमें कुल 2,624 जिला परिषद और 4,814 पंचायत समिति उम्मीदवार मैदान में थे। इन चुनावों के नतीजे एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित एकीकरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। पुणे, सातारा, सोलापुर और सांगली में दोनों गुटों ने अनौपचारिक गठबंधन के तहत अपने उम्मीदवार मूल चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ के साथ उतारे, जिससे एनसीपी ने स्थानीय निकायों में अपना दबदबा कायम रखा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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