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दुनिया भर में नौकरियों का संकट गहराता जा रहा है। मीडिया संस्थानों से लेकर वैश्विक टेक कंपनियों तक बड़े पैमाने पर छंटनी देखी जा रही है। प्रतिष्ठित अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने न्यूजरूम और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग टीम में भारी कटौती की है। पश्चिम एशिया की पूरी टीम हटाई गई, जबकि दिल्ली, बीजिंग, कीव और बर्लिन जैसे प्रमुख ब्यूरो या तो बंद कर दिए गए हैं या सीमित कर दिए गए। इसे पारंपरिक मीडिया के लिए डिजिटल दबाव और घटते संसाधनों का संकेत माना जा रहा है।
टेक सेक्टर में हालात और भी गंभीर हैं। 2025 में वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने 1.2 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म कीं। इंटेल ने करीब 24 हजार, टीसीएस ने 20 हजार, वेरिजोन ने 15 हजार और एक्सेंचर ने 11 हजार कर्मचारियों की छंटनी की। माइक्रोसॉफ्ट, एसएपी और तोशिबा जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी हजारों पद घटाए। विशेषज्ञों के मुताबिक लागत नियंत्रण, कारोबारी पुनर्गठन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ता फोकस इसके पीछे की बड़ी वजहें हैं, जहां ऑटोमेशन मानव श्रम की जगह ले रहा है।
2026 की शुरुआत भी राहत लेकर नहीं आई है। अमेजन ने चार महीनों के भीतर 30 हजार कॉरपोरेट कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया, जबकि ओरेकल में 20 से 30 हजार तक की संभावित छंटनी की अटकलें हैं। विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, 41% कंपनियां आने वाले वर्षों में एआई के कारण वर्कफोर्स घटाने की तैयारी में हैं। हालांकि, रिपोर्ट यह भी इशारा करती है कि एआई, बिग डेटा और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियां तेजी से उभर सकती हैं, जिससे रोजगार का स्वरूप बदलेगा, खत्म नहीं होगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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