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अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) से जुड़े करीब ₹40 हजार करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि CBI और ED जांच में हुई देरी का कोई ठोस कारण नहीं बता सकीं और अब आगे किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने दोनों एजेंसियों को चार हफ्ते में ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड किया कि अनिल अंबानी उसकी पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। यह आश्वासन अनिल अंबानी ने अपने वकील मुकुल रोहतगी के जरिए दिया, जब याचिकाकर्ता और पूर्व IAS अधिकारी ईएएस सरमा ने उनके देश छोड़ने की आशंका जताई। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी हैं और उनके समूह पर ₹40 हजार करोड़ सायफन करने का आरोप है। एजेंसी के अनुसार अपराध से अर्जित आय ₹20 हजार करोड़ से ज्यादा आंकी गई है और ₹8,078 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की जा चुकी है।
वहीं, अनिल अंबानी की ओर से पेश वकील श्याम दीवान ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कारोबारी घाटे और कर्ज में चूक को आपराधिक मामला नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने करीब ₹20 हजार करोड़ चुका दिए हैं। याचिका में आरोप है कि 2007-08 से फ्रॉड चल रहा था, लेकिन FIR 2025 में दर्ज हुई, जबकि ED की जांच में लोन डायवर्जन, NPA और लोन अप्रूवल प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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