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छत्तीसगढ़ में निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे मरीजों को एक बड़ी राहत मिली है। अब कोई भी मरीज अस्पताल की फार्मेसी से ही दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं होगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने प्रदेश के सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि वे सूचना बोर्ड लगाएं जिन पर स्पष्ट लिखा होगा कि मरीज किसी भी अधिकृत मेडिकल स्टोर से दवा खरीद सकते हैं। इससे मरीजों को दवा खरीदने के विकल्प खुद चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी।
यह कदम रायपुर निवासी वासुदेव जोतवानी की शिकायत के बाद उठाया गया। उन्होंने बताया कि कई निजी अस्पताल मरीजों और उनके परिजनों पर दवा सिर्फ अपने अस्पताल की फार्मेसी से खरीदने के लिए दबाव बनाते थे। बाहर से दवा लाने पर इलाज की जिम्मेदारी न लेने जैसी बातें कही जाती थीं, जिससे खासकर गरीब मरीज मानसिक और आर्थिक दबाव में आ जाते थे। कई मामलों में अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की कीमतें बाजार के मुकाबले 100–150 प्रतिशत तक अधिक पाई गई थीं, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता था।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन नियंत्रक कार्यालय ने सभी औषधि निरीक्षकों और सहायक औषधि नियंत्रकों को निर्देश दिया है कि वे हर निजी अस्पताल में सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाने को सुनिश्चित करें। इस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि मरीज अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी अधिकृत मेडिकल स्टोर से दवाएं ले सकते हैं। इस फैसले से न केवल मरीजों को वित्तीय राहत मिलेगी, बल्कि निजी अस्पतालों की मनमानी व्यवहार और अतिरिक्त लाभ के प्रयासों पर भी रोक लगेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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