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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइन को लेकर उठे विवाद और सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब पुरानी गाइडलाइन ही लागू रहेगी। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर मध्यप्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय और निजी विश्वविद्यालयों के साथ संबद्ध कॉलेजों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए यूजीसी विनियम, 2023 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करना अनिवार्य होगा।
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार अधिकांश संस्थानों में लोकपाल की नियुक्ति तो कर दी गई है, लेकिन यूजीसी 2023 के अनुरूप अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके चलते छात्रों की शिकायतें लंबित रहती हैं और उन्हें समय पर न्याय नहीं मिल पाता। विभाग ने चेतावनी दी है कि अब इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपनी वेबसाइट और प्रोस्पेक्टस में एसजीआरसी सदस्यों के नाम, पदनाम, संपर्क विवरण और लोकपाल की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
जारी आदेश के तहत प्रत्येक संस्थान को छात्रों के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित करना अनिवार्य किया गया है, जहां दर्ज शिकायत को 15 दिनों के भीतर संबंधित समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले प्रोस्पेक्टस का ऑनलाइन प्रकाशन जरूरी होगा। प्रोस्पेक्टस में पाठ्यक्रम, सीटों की संख्या, योग्यता मानदंड, चयन प्रक्रिया, फीस संरचना, रिफंड नीति, जुर्माना, संकाय की योग्यता, बुनियादी ढांचा, हॉस्टल, लाइब्रेरी और रैगिंग-रोधी नियमों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य रहेगा। गलत या भ्रामक जानकारी पाए जाने पर छात्र सीधे एसजीआरसी और लोकपाल से शिकायत कर सकेंगे
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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