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मध्य प्रदेश स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिल्ली में मोरारी बापू की रामकथा में हिस्सा लेते हुए कहा कि एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के युग में हिंदुत्व बुद्धिमत्ता (HI) की आवश्यकता है। उन्होंने धर्म को न केवल सामाजिक एकता और नैतिकता का आधार बताया, बल्कि दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध से बचाने और वैश्विक शांति स्थापित करने का मार्ग भी कहा। शास्त्री ने स्पष्ट किया कि धर्म ही व्यक्ति को अनैतिक कार्यों से रोकने और देश को मजबूत बनाने में मदद करता है।
इस मौके पर उन्होंने आचार्य लोकेश मुनि द्वारा स्थापित किए जा रहे विश्व शांति केंद्र की सराहना की और इसे सनातन धर्म को पूरे भारत में एकजुट करने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि देश में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति मूल रूप से सनातनी है। इसी भावना के साथ शास्त्री ने घोषणा की कि अब से आचार्य लोकेश मुनि को ‘आचार्य लोकेश मुनि सनातनी’ के नाम से जाना जाएगा, जो सनातन चेतना को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में उपस्थित संतों, धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं ने भी विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और सनातन मूल्यों के संरक्षण पर अपने विचार साझा किए। रामकथा का समापन शांति, एकता और अहिंसा के संदेश के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह पर गहरी छाप छोड़ी। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्पष्ट किया कि धर्म और
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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