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भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने सोमवार को शाहपुरा झील के आस-पास कथित अतिक्रमण और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया। ट्रिब्यूनल ने ज़िला प्रशासन, जल संसाधन विभाग (WRD) और भोपाल नगर निगम (BMC) को ज़िम्मेदारी एक-दूसरे पर टालने के लिए फटकार लगाई।
नितिन सक्सेना बनाम MP स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी और अन्य मामले की सुनवाई करते हुए, जस्टिस श्यो कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि अलग-अलग विभाग मिलकर कार्रवाई करने के बजाय ज़िम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे थे।
ट्रिब्यूनल ने कोलार SDM पीसी पांडे, जल संसाधन विभाग (WRD) और भोपाल नगर निगम (BMC) को निर्देश दिया कि वे इस काम के लिए बनाई गई कमेटी के साथ मिलकर काम करें और 10 दिनों के भीतर झील के फुल टैंक लेवल (FTL) और बफ़र ज़ोन की संयुक्त सीमा तय करें। FTL और बफ़र की सीमाएं तय होने के बाद, कोलार SDM को निर्देश दिया गया है कि वे झील के कैचमेंट एरिया और 50 मीटर के बफ़र एरिया से अवैध और अस्थायी ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू करें।ट्रिब्यूनल ने SDM पांडे के बिना पूरी जानकारी और तैयारी के पेश होने पर भी कड़ी नाराज़गी जताई। अधिकारी को निर्देश दिया गया कि वे भविष्य की कार्यवाही में पूरी तैयारी सुनिश्चित करें। NGT ने विस्तृत जवाब न देने पर BMC को भी चेतावनी दी और नगर निकाय को अगली सुनवाई से पहले अपनी अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) दाखिल करने का निर्देश दिया।ट्रिब्यूनल के सामने रखी गई रिपोर्ट के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को MP स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के ज़रिए ड्रोन सर्वे किया गया था। सर्वे में कैचमेंट एरिया में कई स्थायी और अस्थायी ढांचे और कथित अतिक्रमण की पहचान की गई। याचिकाकर्ता के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने कहा कि शाहपुरा झील एक नोटिफ़ाइड वेटलैंड है। उन्होंने आरोप लगाया कि झील में बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज लगातार आ रहा है और बफ़र ज़ोन में अतिक्रमण भी बना हुआ है, जो वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का उल्लंघन है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी, जब अधिकारियों को निर्देशों के आधार पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) जमा करनी होगी।
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