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भोपाल में बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पासपोर्ट दिलाने वाले नेटवर्क की जांच में एसटीएफ अब तक 75 आरोपियों को चिह्नित कर चुकी है।इनमें बांग्लादेशी नागरिकों के साथ फर्जी दस्तावेज, पते और गवाह उपलब्ध कराने वाले लोग शामिल हैं। 19 आरोपी अभी फरार हैं। मामले में अब तक मामले में अब तक छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। रियाल चौधरी, विप्लब अधिकारी, प्रियान रॉय और जॉय चौधरी, नसीम अख्तर और गयाप्रसाद गौतम गिरफ्तार की किया गया। एसटीएफ ने भोपाल के अन्नानगर से 40, डबरा से 17, बैतूल के आमला बौद्ध मठ से 11 और छिंदवाड़ा-पाहुर्ना से दो फर्जी पासपोर्ट से जुड़े मामले चिह्नित किए हैं। फरारा आरोपियों पर 20-20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। फरार आरोपियों में डबरा का गुलाब राय समेत दो, भोपाल के 14 और बैतूल के तीन आरोपी शामिल हैं।वहीं पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एसटीएफ डीआईजी राहुल लोढ़ा के मुताबिक, आरोपियों ने भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, डबरा और पाहुर्ना के मठों के पते का इस्तेमाल किया। कुछ अफसरों और कर्मचारियों की मदद से पासपोर्ट तैयार किए। जांच में सामने आया कि करीब 70 फर्जी पासपोर्ट में से 50 में गयाप्रसाद गौतम, गुलाब राय और रियाल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद ही गवाह बने। ज्यादातर पासपोर्ट में इन्हीं के मोबाइल नंबर मिल हैं। मठों के पते के बार-बार इस्तेमाल होने से इनकी भूमिका जांच के केंद्र में है। जानकारी के मुताबिक फरार आरोपी गुलाब राय की मुलाकात रियाल चौधरी से बैतूल के आमला के शिविर में हुई थी। इसके बाद झांसी के शिविर में भी दोनों मिले। डबरा के आंबेडकर पार्क में लगे शिविर में गुलाब अपने साथियों के साथ पहुंचा था। बाद में बौद्ध धर्म के प्रचार के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए। एसटीएफ मप्र के अलावा असम, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पंजाब में आरोपियों के होने की आशंका है। छिपे होने की जानकारी मिली है। गयाप्रसाद गौतम चिनोर का है। गांव का सरपंच रह चुका है। दीक्षा लेने के बाद 2021-22 में डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित आंबेडकर पार्क में भंते के रूप में रहने लगा। एसटीएफ उसे गिरफ्तार कर चुकी है।
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