Advertisement
समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने 2029 से पहले बीजेपी और NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू होने की उम्मीद जताई थी। अल्वी ने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि समान नागरिक संहिता लागू करने से क्या बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक चुनौतियों जैसी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को इन मुद्दों के बजाय धार्मिक और सामाजिक विषयों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
राशिद अल्वी ने कहा कि देश में अलग-अलग समुदायों के लिए व्यक्तिगत कानून मौजूद हैं और ऐसे में सभी NDA राज्यों में UCC लागू करने की बात को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के एजेंडे में तीन तलाक, UCC और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर इस्लामी विद्वान मुफ्ती वजाहत कासमी ने अलग राय रखी। उन्होंने UCC को देश के विकास और समान कानून व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होने से व्यवस्था अधिक एकरूप हो सकती है। उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक कानून और एक संविधान’ की अवधारणा का समर्थन करते हुए उत्तराखंड में लागू UCC का भी उल्लेख किया।
दरअसल, UCC को लेकर अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 से पहले बीजेपी और NDA के शासन वाले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में इस दिशा में काम आगे बढ़ चुका है और कुछ जगहों पर इसे लागू भी किया गया है। उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में UCC आने वाले समय में राजनीतिक बहस का एक बड़ा मुद्दा बन सकता है और इसके अलग-अलग पहलुओं को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच चर्चा जारी रहने की संभावना है।
Kolar News
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |