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भोपाल । विकास के नाम पेड़ों की बलि दे दी गई। अब इसको लेकर एनजीटी सख्त है। नितिन सक्सेना मामले की सुनवाई को लेकर एनजीटी ने नगर निगम, वन विभाग से रिकॉर्ड मांगा है। कहा गया कि पेड़ काटने के बाद उनकी भरपाई नाम मात्र की हुई। पौधों की कम जीवितता दर गंभीर है। केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है। एनजीटी ने कहा है मरे पौधों की जगह दोबारा पौधे लगाए जाएं। 100 प्रतिशत सर्वाइवल हो। सड़क किनारे और मीडियन में लगाए जाने वाले 10 हजार पौधों, हुजूर तहसील में आवंटित जमीन पर लगाए गए 70 हजार पौधों का साइटवार विवरण और तस्वीरें देने के लिए कहा गया है। पांच साल में लगाए गए पौधों की औसत ऊंचाई, मोटाई और सर्वाइवल प्रतिशत का रिकार्ड भी मांगा है। छह अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी।
राशि मिली पर नहीं शुरू हुआ काम
डीएफओ पर्यावरण वानिकी मंडल की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पौधारोपण के लिए राशि मिलने के बावजूद 2026 के मानसून में पौधारोपण शुरू नहीं हुआ। एनजीटी ने इस देरी पर भी रिपोर्ट मांगी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पिछले पांच वर्षों में एनएचएआई और अन्य एजेंसियों से मिली राशि तथा उसके बदले किए गए पौधारोपण का जिला-वार ब्यौरा देना होगा।
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