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BRICS समिट में भारत की बड़ी भूमिका, चीन के दबदबे के बीच ग्लोबल साउथ पर फोकस
India

 

भारत में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले इस सम्मेलन में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन के बढ़ते प्रभाव और अमेरिका के दबाव के बीच संतुलन बनाने की होगी। BRICS में चीन की आर्थिक ताकत काफी प्रभावशाली है और व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग तथा जरूरी खनिजों जैसे क्षेत्रों में उसका असर दिखाई देता है। भारत की कोशिश रहेगी कि BRICS किसी एक देश के प्रभाव वाला मंच न बने और सभी सदस्य देशों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले।

अमेरिका की नजर भी BRICS की गतिविधियों पर बनी हुई है, खासकर डॉलर के विकल्प और डी-डॉलराइजेशन से जुड़ी चर्चाओं को लेकर। भारत ने साझा BRICS करेंसी के विचार का समर्थन नहीं किया है, लेकिन स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और बेहतर सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही है। ऐसे में भारत के लिए रूस और चीन जैसे देशों के साथ सहयोग बनाए रखने के साथ पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को भी संतुलित रखना बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी। भारत BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की मांग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दे सकता है।

भारत इस सम्मेलन को केवल बैठकों और बयानों तक सीमित रखने के बजाय ठोस सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है। सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, स्टार्टअप, विकास वित्त और डिजिटल पेमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयास जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील मुद्दों पर BRICS देशों के अलग-अलग रुख के कारण साझा घोषणा पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा। अगर भारत अलग-अलग हितों के बीच संतुलन बनाते हुए ठोस नतीजे हासिल करता है, तो यह सम्मेलन वैश्विक मंच पर उसकी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

 

 

Kolar News 8 September 2026

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