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ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। इस दौरान पहली बार प्रतिमा देवी खुद कोर्ट पहुंचीं और अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की मूल वसीयत उनके पास नहीं है, लेकिन मुंबई कोर्ट में मौजूद वसीयत की कॉपी के आधार पर उन्हें भी संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बंटवारे की प्रक्रिया में उन्हें उचित रूप से शामिल नहीं किया गया।
प्रतिमा देवी ने कोर्ट में नोटिस भेजे जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें नेपाल के नेपालगंज पते पर नोटिस भेजे गए, जबकि उनका निवास काठमांडू में है। ऐसे में उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिल पाई और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। उन्होंने अपनी छोटी बहनों का भी जिक्र करते हुए कहा कि वे भी अपनी मां के हिस्से पर दावा कर रही हैं। प्रतिमा देवी, सिंधिया परिवार की दिवंगत पद्माराजे की बेटी हैं।
सिंधिया परिवार की संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच पहले से विवाद चल रहा है। परिवार के बीच आपसी समझौते के जरिए बंटवारे की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, लेकिन प्रतिमा देवी को इसमें शामिल नहीं किए जाने के बाद मामला फिर कानूनी विवाद में पहुंच गया। मंगलवार को उनके आवेदन पर बहस होनी थी, लेकिन सभी पक्ष तैयार नहीं होने के कारण बहस टल गई। अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी, जहां प्रतिमा देवी के आवेदन और अन्य पक्षों की दलीलों पर सुनवाई होगी।
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