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OBC क्रीमी लेयर को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण की मांग की है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DoPT ने 11 मार्च के फैसले को लेकर दायर याचिका में खासतौर पर सिविल सेवा परीक्षा 2025 के उम्मीदवारों का मुद्दा उठाया है। सरकार की चिंता है कि फैसले को मौजूदा चयन प्रक्रिया पर लागू करने से मेरिट, कैडर आवंटन, ट्रेनिंग और अधिकारियों की वरिष्ठता में बदलाव की स्थिति बन सकती है।
मामले की जड़ 2004 के उस नियम से जुड़ी है, जिसमें PSU और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की वेतन आय को OBC क्रीमी लेयर तय करने में शामिल किया गया था। इसी आधार पर CSE-2015 के बाद करीब 100 सफल OBC उम्मीदवारों के दावे क्रीमी लेयर के कारण प्रभावित हुए। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को कहा था कि सिर्फ वेतन आय को आधार बनाकर ऐसे उम्मीदवारों को OBC आरक्षण से बाहर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे समानता और आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में देखा था।
अब केंद्र की मांग है कि फैसले का असर पहले पूरी हो चुकी चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों पर न पड़े। वहीं, अगर आदेश का लाभ पुराने मामलों तक पहुंचता है, तो 2016 से प्रभावित करीब 100 उम्मीदवारों के दावों पर दोबारा विचार हो सकता है और उनकी रैंक में भी बदलाव संभव है। फिलहाल CSE-2025 समेत पुराने मामलों को लेकर तस्वीर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण और आगे के निर्देशों के बाद ही साफ होगी।
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