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राज्यसभा सांसद और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा SIR प्रक्रिया को वैध ठहराए जाने के बाद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला प्रक्रिया को कानूनी वैधता दे सकता है, लेकिन इससे मोदी सरकार की “दुर्भावनापूर्ण मंशा” खत्म नहीं हो जाती। दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना पर्याप्त कारण के जल्दबाजी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) लागू किया, जिसका उद्देश्य पहले मतदाताओं के नाम हटाना और बाद में सवाल पूछना था।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि देशभर में सरकार अपनी नीतियों को लेकर जनता के आक्रोश का सामना कर रही है और निष्पक्ष चुनावी मुकाबले में कमजोर पड़ने के कारण अब यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि कौन वोट दे सकता है और कौन नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में चुनिंदा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और फिर उन्हें जटिल अपील प्रक्रिया में उलझाया जा रहा है। उनके मुताबिक यह पूरी कवायद राजनीतिक संतुलन को अपने पक्ष में करने की कोशिश है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को खुद चुनाव आयोग को कई सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश देने पड़े, जिनमें हटाए गए मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करना, नाम हटाने के कारण बताना और आधार कार्ड को स्वीकार करना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग शुरुआत में इन बातों को मानने को तैयार नहीं था। दिग्विजय सिंह के अनुसार पूरी प्रक्रिया खामियों से भरी हुई है और इसके क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल अब भी कायम हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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