Advertisement
बिहार में राज्यसभा चुनाव में पांच सीटों के लिए वोटिंग होने जा रही है, जिसमें पांचवीं सीट पर सबसे ज्यादा निगाहें टिकी हैं। महागठबंधन ने राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) को मैदान में उतारा है। एडी सिंह की संपत्ति अन्य उम्मीदवारों से काफी अधिक है और वे भूमिहार जाति से आते हैं। राजद और तेजस्वी यादव इस सीट को अपने पक्ष में लाने के लिए एनडीए के भूमिहार विधायकों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिससे एनडीए की चिंता बढ़ गई है।
तेजस्वी यादव ने महागठबंधन, बसपा और AIMIM के विधायकों की बैठक बुलाई है और एडी सिंह को हर हाल में जीताने के लिए विधायकों को दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। AIMIM के बिहार प्रमुख अख्तरूल ईमान ने समर्थन देने के बदले विधान परिषद की एक सीट की मांग रखी है। अगर AIMIM के पांच और बसपा के एक विधायक राजद को समर्थन देते हैं, तो एडी सिंह की जीत आसान हो जाएगी, क्योंकि उन्हें केवल छह विधायकों के वोट की जरूरत है।
एनडीए के लिए भी पांचवीं सीट पर जीत आसान नहीं है। उपेंद्र कुशवाहा ने तीन विधायकों को अपने पाले में लाने की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष आलोक को सौंपी है। ऐतिहासिक दृष्टि से 2014 में जदयू विधायकों की बगावत ने साबित किया कि चुनाव में अप्रत्याशित परिस्थितियां भी असर डाल सकती हैं। इस बार राज्यसभा चुनाव का गुणा गणित भी दर्शाता है कि पांच सीटों के लिए कुल 205 विधायकों के वोट आवश्यक हैं, जिसमें हर एक वोट की अहमियत निर्णायक साबित हो सकती है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |