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पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पश्चिम एशिया संकट में, ईरान-सऊदी तनाव बढ़ा सकता है जंग का खतरा
Pakistan

 

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब लगातार हमलों का निशाना बन रहा है। खाड़ी के इस देश के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर हाल के दिनों में ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले हुए हैं। इसी बीच रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान की अहम बैठक हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा की और संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत सहयोग की बात कही।

सऊदी अरब के शायबा ऑयल फील्ड पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों में छह ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलें नष्ट कर दी गईं। यह क्षेत्र यूएई की सीमा के पास स्थित है और इस हमले के बाद ईरान की सक्रिय भागीदारी सामने आई है। पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अब और महत्वपूर्ण हो गई है। उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में खुलासा किया कि पाकिस्तान ने ईरान से संपर्क कर सुनिश्चित किया कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा।

हालांकि, अगर ईरान द्वारा हमले जारी रहते हैं और पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता सक्रिय होता है, तो संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। पाकिस्तान का शामिल होना दक्षिण एशिया को भी इस जटिल जंग में खींच सकता है, क्योंकि पाकिस्तान और ईरान की लंबी सीमा है। ऐसे हालात में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

 
 
Priyanshi Chaturvedi 7 March 2026

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