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राजधानी जयपुर की सड़कें इन दिनों सुरक्षित सफर की जगह जानलेवा बनती जा रही हैं। तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों की खुलेआम अनदेखी के चलते रोज किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ रहा है। कहीं फुटपाथ पर खड़े लोग कुचले जा रहे हैं, तो कहीं सड़क पार करते मासूम हादसे का शिकार हो रहे हैं। हर दुर्घटना के बाद सवाल उठता है कि आखिर कानून का डर इन लापरवाह चालकों पर क्यों नहीं है।
आंकड़े हालात की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। 1 से 22 जनवरी के बीच जयपुर में 100 से अधिक सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 24 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। जयपुर पूर्व में 9, पश्चिम में 7, उत्तर में 5 और दक्षिण में 3 लोगों की जान गई। हादसों की संख्या और मौतों का आंकड़ा यह साफ करता है कि लापरवाही अब एक गंभीर संकट बन चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नशे में या तेज रफ्तार से वाहन चलाकर किसी की मौत को “सामान्य दुर्घटना” नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाना चाहिए। सख्त गैर-जमानती धाराएं, हिट एंड रन मामलों में कड़ी कार्रवाई, ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे कदम ही इन हादसों पर लगाम लगा सकते हैं। अब जयपुर की सड़कें और पीड़ित परिवार सिस्टम से सख्त और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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