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अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा में 7 साल के मासूम विशाल की मौत ने पूरे इलाके को सदमा दे दिया। ओल्टी-दस्त से परेशान बच्चे को इलाज के लिए माता ललिताबाई क्लीनिक लेकर गई थी, जहां झोलाछाप डॉक्टर प्रदीप बुनकर ने दो ड्रिप और कई इंजेक्शन लगाए। कुछ समय बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी और सरकारी अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।
जांच में पता चला कि प्रदीप बुनकर केवल 12वीं पास है और नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा है, लेकिन उसने खुद को डॉक्टर बताकर क्लीनिक चलाया। पुलिस ने उसके बिना योग्य डिग्री इलाज करने और सही समय पर उचित चिकित्सा न देने को गंभीर लापरवाही माना। इस मामले में 15 महीने बाद अब भारतीय दंड संहिता की धारा 105 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब विशाल की मां ने दो बार बच्चे को इलाज के लिए ले जाकर झोलाछाप डॉक्टर के इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाया। पहले इलाज के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर डॉक्टर ने उसे सरकारी अस्पताल भेजने को कहा, लेकिन तब तक बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने स्वास्थ्य सुरक्षा और झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या पर गंभीर चेतावनी दी है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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