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राजगढ़ जिले के मोहनपुरा डैम ने विकास की चमक के पीछे एक बड़ी त्रासदी को जन्म दिया है। यहां बने डैम के कारण ब्यावरा और उदयपुरिया को जोड़ने वाली सड़क एक किलोमीटर के हिस्से में पानी में डूब गई है। परिणामस्वरूप 50 से ज्यादा गांवों के 50 हजार से अधिक लोग सड़क मार्ग के बजाय नाव पर निर्भर होकर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। यह इलाका अब एक प्रकार की 'वैतरणी' बन गया है, जहां लोग रोजाना जान हथेली पर लेकर नाव से सफर करते हैं।
ब्यावरा से उदयपुरिया की दूरी केवल 1 किलोमीटर थी, लेकिन सड़क डूबने के बाद सड़क मार्ग से जाने पर लोगों को राजगढ़ और पचौर होते हुए 60 किलोमीटर का फेरा लगाना पड़ता है। ग्रामीण जगदीश रोहेला के अनुसार, सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक सिर्फ चार नावें ही 50 गांवों के लोगों की जीवनरेखा बनी हुई हैं। पीएमजीएसवाइ के जीएम राहुल वर्मा ने कहा कि पुल प्रस्तावित है और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, लेकिन फिलहाल ग्रामीण नाव पर ही निर्भर हैं।
नाव का किराया महज 10 रुपए है, जबकि सड़क मार्ग से जाना महंगा और लंबा है – लगभग 140 रुपए खर्च होंगे और ढाई घंटे का सफर तय करना पड़ेगा। नावें एक बार में 50 लोगों, 25 बाइकों और भारी दूध टंकियों के साथ चल रही हैं। तेज हवा और डैम के बीचों बीच डगमगाती नाव पर बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों की जान खतरे में है। ग्रामीण इस सफर को रोजमर्रा की मजबूरी मानते हैं, लेकिन सरकार की लापरवाही ने उनकी जिंदगी को जोखिम में डाल दिया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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