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उत्तर प्रदेश में सामने आए लगभग 100 करोड़ रुपये के जीएसटी चोरी मामले ने प्रशासनिक और कर विभाग के हलकों में सनसनी मचा दी है। गाजियाबाद के कवि नगर थाने में दर्ज एफआईआर में दिल्ली में तैनात केंद्रीय जीएसटी (CGST) इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल का नाम शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि यह मामला एक संगठित टैक्स चोरी सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है। गिरोह ने दर्जनों फर्जी कंपनियां बनाईं, जिनका कोई वास्तविक व्यापार नहीं था। इन फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन कागजों पर दिखाए गए और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत दावा किया गया। नकली ई-वे बिल और इनवॉइस का उपयोग कर सिंडिकेट ने सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने फर्जी फर्मों के नेटवर्क और टैक्स चोरी की पूरी कार्यप्रणाली का खुलासा किया।
एसटीएफ ने दावा किया है कि दिल्ली में तैनात CGST इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल ने इस घोटाले में विभागीय स्तर पर आरोपी गिरोह की मदद की। जांच में सामने आया कि उन्होंने फर्जी फर्मों को संरक्षण दिया, संदिग्ध लेन-देन पर कार्रवाई से बचाया और निलंबित फर्मों को दोबारा सक्रिय कराने में मदद की। इसके एवज में इंस्पेक्टर ने रिश्वत भी ली। मामला गंभीर होने के कारण जांच को और तेज कर दिया गया है और आरोपी की जल्द गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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