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इंदौर के भागीरथपुरा मामले ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को खुलकर सामने ला दिया है। एक ओर पार्टी का एक खेमा पूरी सक्रियता के साथ सड़क पर उतरकर सरकार को घेरने में जुटा है, तो वहीं दूसरा धड़ा पूरी तरह नदारद दिखाई दे रहा है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार तक इस मुद्दे पर लगातार सक्रिय हैं। सिंघार ने दो दिन तक इंदौर में डेरा डालकर साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस का एक वर्ग इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर भुनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
भागीरथपुरा प्रकरण में सज्जन सिंह वर्मा, शोभा ओझा और स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता अब तक मौके पर नहीं पहुंचे हैं। इसके साथ ही कुछ पूर्व शहर अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी ने भी गुटबाजी की चर्चाओं को हवा दी है। इसी बीच युवक कांग्रेस ने 9 से 15 जनवरी तक सांकेतिक सत्याग्रह का ऐलान किया है, जिससे साफ है कि संगठन का एक हिस्सा आक्रामक रुख अपनाए हुए है, लेकिन पूरी कांग्रेस एक सुर में नजर नहीं आ रही।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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