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उत्तर प्रदेश में SIR (Summary Revision of Electoral Rolls) के बाद लगभग 2.88 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। खासकर कम मार्जिन वाली सीटों पर इसका असर निर्णायक साबित हो सकता है। साल 2022 में 114 ऐसी सीटें थीं, जहां जीत-हार का अंतर 10 हजार से कम था। अब इन सीटों पर नाम कटने या जुड़ने से चुनावी समीकरण बदलने की संभावना है, जिससे सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी सपा दोनों की चिंता बढ़ गई है।
विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में BJP के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, जबकि पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में सपा को नुकसान हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर SIR का प्रभाव निर्णायक होगा और दोनों दलों की रणनीतियों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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