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सोमनाथ मंदिर के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखा पत्र साझा करते हुए दावा किया कि आज़ाद भारत में सोमनाथ मंदिर के प्रति सबसे नकारात्मक रवैया खुद नेहरू का था। सांसद का आरोप है कि नेहरू ने 21 अप्रैल 1951 के पत्र में सोमनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक कथाओं को “पूरी तरह झूठा” बताते हुए मंदिर के पुनर्निर्माण से दूरी बनाई और पाकिस्तान को आश्वस्त करने की कोशिश की।
सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि नेहरू न केवल सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के पक्ष में नहीं थे, बल्कि उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी उद्घाटन समारोह में शामिल न होने की सलाह दी थी। साथ ही मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर विदेशों में भारत की छवि खराब होने की बात कही और मीडिया कवरेज सीमित रखने के निर्देश दिए। सांसद ने यह भी दावा किया कि नेहरू ने सोमनाथ ट्रस्ट को किसी भी तरह की सहायता देने से इनकार कर दिया था। इन आरोपों के बाद सोमनाथ मंदिर, नेहरू की नीतियों और धर्मनिरपेक्षता को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है, हालांकि कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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