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भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम की शिकायत पर देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज FIR के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विवादित सोशल मीडिया पोस्ट और उन पर किए गए आपत्तिजनक कमेंट पुलिस जांच के दायरे में आ गए हैं। आरोप है कि अंकिता के नाम का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ पोस्ट के जरिए उत्तराखंड में दंगे भड़काने और भाजपा की छवि खराब करने की साजिश रची गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सबसे पहले उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने ऐसे पोस्ट शेयर किए या विवादित टिप्पणियां कीं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड सितंबर 2022 में सामने आया था, जब ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता लापता हुई और बाद में उसका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ। इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों पर हत्या के आरोप लगे थे, जो फिलहाल अदालत में विचाराधीन हैं। अब सोशल मीडिया विवाद, वीआईपी एंगल, SIT जांच, कोर्ट के निर्देश और 11 जनवरी को प्रस्तावित ‘उत्तराखंड बंद’ के ऐलान के चलते यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी रूप से चर्चा में आ गया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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