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भाेपाल । ओबीसी आरक्षण विवाद पर लंबित याचिकाओं को लेकर मप्र लोक सेवा आयोग (एमपी-पीएससी) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में नया आवेदन दिया। आयोग ने 19 अगस्त को दाखिल किए गए अपने काउंटर एफिडेविट को वापस लेने की मांग की है। उस एफिडेविट में कहा गया था कि 27% आरक्षण की मांग वाली याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं, इसलिए खारिज होनी चाहिए। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी (अनकंडीशनल अपोलॉजी) भी मांगी है। अब इस मामले में कांग्रेस हमलावर हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। कमलनाथ ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बार-बार अपने ही बुने जाल में फंस रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया को उलझा रही है।
कमलनाथ ने गुरुवार काे साेशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर कई गंभीर आराेप लगाए। उन्हाेंने अपने आफिशियल एक्स अकाउंट पर ट्वीट कर कहा 18 अगस्त को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल काउंटर एफिडेविट में कहा था कि ओबीसी को 27% आरक्षण की मांग करने वाली याचिकाएँ सुनवाई योग्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें खारिज किया जाना चाहिए। अब वही आयोग माफ़ी माँगते हुए उस एफिडेविट को वापस लेने का आवेदन कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आराेप लगाते हुए कहा कि स्पष्ट है कि यह एफिडेविट सरकार के इशारे पर दाखिल किया गया था। लेकिन जैसे ही सरकार को एहसास हुआ कि यह कदम उसके ओबीसी विरोधी चेहरे को उजागर कर देगा, तुरंत नाटक और नौटंकी शुरू कर दी। ध्यान देने योग्य है कि एमपीपीएससी के अध्यक्ष और सदस्य राज्य सरकार नियुक्त करती है। सचिव के तौर पर भी राज्य प्रशासनिक सेवा या आईएएस अधिकारी की नियुक्ति सरकार ही करती है। ऐसे में यह मानना कि आयोग का शपथपत्र सरकार की मंशा से अलग है—महज एक मज़ाक है। उन्हाेंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सभी प्रक्रियाएँ पूरी कर कानून बनाकर ओबीसी को 27% आरक्षण लागू किया था। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार साफ कर चुके हैं कि इस पर कोई रोक नहीं है। फिर भी वर्तमान सरकार लगातार नए प्रपंच रचकर आरक्षण प्रक्रिया को उलझा रही है। कमलनाथ ने आगे कहा कि सरकार द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाना भी जनता को गुमराह करने का षड्यंत्र है। जब कांग्रेस सरकार पहले ही 27% आरक्षण लागू कर चुकी है, तो सर्वदलीय बैठक की ज़रूरत ही क्यों? यह साफ़ है कि सरकार ओबीसी समाज को बरगलाने और भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
कमलनाथ ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जिस तरह एमपीपीएससी ने माफी मांगी है, उसी तरह राज्य सरकार भी अपने पुराने षड्यंत्रों के लिए माफी मांगे और तत्काल प्रभाव से 27% ओबीसी आरक्षण लागू करे। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को ठगने और बहकाने की हरकतें अब और नहीं चलेंगी।
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