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गुवाहाटी। यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (उल्फा-इंडिपेंडेंट) ने दावा किया है कि भारतीय सेना ने रविवार की रात में म्यांमार स्थित उसके शिविरों और ठिकानों पर बड़ा ड्रोन हमला किया है।भारतीय सेना की इस सीमा पार कार्रवाई में उसके संगठन के दो कमांडर समेत कई अन्य समदस्य (उग्रवादी) मारे गए हैं। हालांकि, भारतीय रक्षा मंत्रालय और म्यांमार के अधिकारियों की ओर से ऐसे किसी हमले की पुष्टि नहीं की गयी है।
उल्फा (स्वायत) का दावा है कि सुरक्षा बलों द्वारा म्यांमार में पूर्वोत्तर के प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (उल्फा-इंडिपेंडेंट), एनएससीएन (के) और पीएलए के शिविरों पर ड्रोन हमले किए गए हैं। सीमा पार की गयी कार्रवाई में उल्फा (स्वा) के दूसरे प्रमुख स्वयंभू कमांडर नयन असोम और स्वयंभू कर्नल प्रदीप असोम समेत उसके संगठन के कई सदस्यों (उग्रवादियों) की मौत हो गयी है। उल्फा (आई) ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि कई मोबाइल शिविरों पर तड़के ड्रोन से हमला किए गए।
अंतिम सूचना मिलने तक, न तो भारतीय रक्षा मंत्रालय और न ही म्यांमार के अधिकारियों ने ही इसकी पुष्टि की है। दोनों की ओर से इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया है।
हालांकि, एक केंद्रीय खुफिया सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि एक बड़े सीमा पार अभियान में, सशस्त्र बलों ने रविवार तड़के म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में स्थित असम, नगालैंड और मणिपुर के उग्रवादी संगठनों, यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई), नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम-खापलांग गुट (एनएससीएन-के) और मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के चार शिविरों पर लगभग 100 ड्रोन हमले किए गए।
जानकारी के अनुसार म्यांमार सेना के साथ समन्वय में किया गया यह ड्रोन हमला, भारतीय सेना द्वारा आज सुबह-सुबह भारत-म्यांमार सीमा पर नगा स्वायत्त क्षेत्र (म्यांमार क्षेत्र में) स्थित उग्रवादी ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया। इनमें से एक मुख्य लक्ष्य वाक्थम बस्ती में उल्फा-स्वा का कैंप 779 था। सूत्र ने दावा किया कि ड्रोन हमले के समय संगठन के पांच कार्यकर्ता शिविर में मौजूद थे। हालांकि, खुफिया सूत्र ने संबंधित शिविर में किसी के घायल होने या मौत की पुष्टि नहीं की।
सूत्र ने बताया कि सागिंग क्षेत्र के हयात बस्ती स्थित उल्फा-आई के 'पूर्वी कमान मुख्यालय' (ईसीएचक्यू) पर एक अलग भीषण हमला किया गया। हालांकि, इस घटना की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों के आधार पर खुफिया सूत्रों ने बताया कि ईसीएचक्यू में उल्फा-आई के शीर्ष कमांडर, 58 वर्षीय नयन मेधी उर्फ नयन असोम, इस हमले में मारा गया। नयन मेधी (नयन असोम) असम के तत्कालीन बरपेटा जिले (अब बजाली) का निवासी था। इसके अलावा, कर्नल प्रदीप असोम सहित उल्फा-आई के कई अन्य कार्यकर्ता भी ड्रोन हमले में मारे गए।
सूत्र ने बताया कि ड्रोन हमले में आस-पास के कई एनएससीएन (के) शिविरों को भी निशाना बनाया गया है। हालांकि, सटीक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि नगा और मणिपुर उग्रवादी समूहों के कई कार्यकर्ता मारे गए। सूत्र ने दावा किया कि ड्रोन हमलों में अराकान कैंप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
सुरक्षा विशेषज्ञ इन हमलों को भारत सरकार की आतंकवाद रोधी रणनीति का एक नया हिस्सा मानते हैं, जिसका उद्देश्य सीमा पार से सक्रिय पूर्वोत्तर के आतंकवादी समूहों के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करना है। म्यांमार के सुदूर जंगलों का इस्तेमाल उल्फा-आई और असम व नगालैंड में सक्रिय अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा लंबे समय से रणनीतिक ठिकानों के रूप में किया जाता रहा है।
उल्लेखनीय है कि परेश बरुवा के बाद उल्फा-आई द्वारा किए गए हमलों की श्रृंखला में नयन असोम नवीनतम है। नयन असोम को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन का एक प्रमुख रणनीतिकार और सैन्य प्रशिक्षक माना जाता है।
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