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नई दिल्ली। दिल्ली में एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा, कहा कि किसानों की आजीविका को और बेहतर बनाने के साथ ही भारत अब केवल अपना पेट भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पूरी दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनकर उभरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में बिना मानक के कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी और इसके नियमन हेतु जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन होगा।
*अभाव के दौर से आत्मनिर्भरता और रिकॉर्ड उत्पादन तक का सफर*
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में देश की कृषि यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि एक दौर वह था जब देश को पीएल-480 के तहत आयातित अनाज पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज भारतीय किसानों के परिश्रम और आधुनिक नीतियों के दम पर देश खाद्यान्न में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है। भारत आज चावल उत्पादन और निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं में दूसरे स्थान पर है। अब समस्या उत्पादन की नहीं, बल्कि उसके वैज्ञानिक भंडारण, प्रबंधन और वैश्विक निर्यात की है।
*'आप अमृत निकालिए, हम उसे नीति बनाकर लागू करेंगे'*
चौहान ने नीति-निर्माण में छात्र और किसान संगठनों की विशेषज्ञता को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन दिन-रात जमीनी हकीकत के बीच काम करते हैं। उन्होंने अधिवेशन में उपस्थित विशेषज्ञों और छात्रों से आह्वान किया, "आप इस राष्ट्रीय अधिवेशन में गहन मंथन कीजिए और निष्कर्ष रूपी अमृत निकालिए, उसे देशहित में बांटने और लागू करने का काम सरकार करेगी।" उन्होंने घोषणा की कि अधिवेशन के निष्कर्षों पर विस्तृत कार्ययोजना बनाने के लिए वे अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक करेंगे, जिसमें शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं पर सीधा काम होगा।
*कृषि छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना पहली प्राथमिकता*
कृषि शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि किसी को भी सिर्फ फीस लेकर डिग्री बांटने की दुकान चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि युवाओं द्वारा ली जाने वाली बीएससी (एजी) और एमएससी (एजी) जैसी तकनीकी डिग्रियों का पूरा मान रहे और वे व्यर्थ न जाएं।
*छोटे किसानों के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' मॉडल*
भारत में औसत जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) जरूरी है। अनाज के साथ-साथ फल, सब्जी, औषधीय खेती, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती को जोड़कर ही किसानों की आजीविका को सुरक्षित व समृद्ध बनाया जाएगा। साथ ही, आधुनिक तकनीक जैसे एआई, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स को खेती से जोड़ने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने एग्रीविज़न के 10 वर्षों के सफर पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन किया।
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