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मध्य प्रदेश में गणेश महोत्सव की शुरुआत के साथ ही प्रमुख गणेश मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में बप्पा का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान गणेश को करीब 7 करोड़ रुपये के स्वर्ण आभूषण पहनाए गए, जबकि इससे पहले ब्रह्ममुहूर्त में उन्हें हीरे जड़ित नेत्र भी धारण कराए गए थे। मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। वहीं, इंदौर के बड़े गणपति मंदिर में भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे और भगवान को 101 किलो के लड्डुओं का भोग लगाया गया। करीब 125 साल पुराने इस मंदिर में गणेशजी की प्रतिमा लगभग 25 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी बताई जाती है।
उज्जैन में भी गणेशोत्सव के पहले दिन खास धार्मिक आयोजन हुए। महाकाल मंदिर परिसर स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश को 5.51 लाख मोदकों का भोग अर्पित किया गया। भोग के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शहर के चिंतामन गणेश मंदिर में भी दर्शन के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं। यहां गणेश प्रतिमा के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना के साथ उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं और मनोकामना पूरी होने के बाद सीधा स्वास्तिक बनाने की परंपरा निभाई जाती है।
सीहोर के प्राचीन चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर में भी गणेश चतुर्थी पर विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां उल्टा स्वास्तिक बनाने से रुके हुए काम पूरे होते हैं और बाद में सीधा स्वास्तिक बनाया जाता है। मंदिर की गणेश प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है और इसका कुछ हिस्सा जमीन में धंसा हुआ है। प्रतिमा की आंखों में हीरे जड़े होने की भी मान्यता है। वहीं, देश के दूसरे प्रमुख गणेश मंदिरों में भी उत्सव का अलग-अलग स्वरूप देखने को मिला। इस बार कई जगहों पर गणेश प्रतिमाओं और पंडालों को खास धार्मिक थीम के साथ सजाया गया है।
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