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दिल्ली की हवा को लेकर संसद में पेश सरकारी आंकड़ों ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति फिर सामने ला दी है। केंद्र सरकार के मुताबिक 2025 में राजधानी में एक भी दिन AQI ‘गुड’ यानी 0 से 50 के बीच नहीं रहा। 365 दिनों में 79 दिन हवा ‘सैटिस्फैक्टरी’, 121 दिन ‘मॉडरेट’, 86 दिन ‘पुअर’, 71 दिन ‘वेरी पुअर’ और 8 दिन ‘सीवियर’ श्रेणी में दर्ज हुई। यानी पूरे साल में 165 दिन हवा ‘पुअर’ या उससे खराब स्तर पर रही। इसके बावजूद सरकार ने प्रदूषण में सुधार का दावा किया है, लेकिन राजधानी को लगातार साफ हवा कब मिलेगी, इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं बताई गई है।
सरकार ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण के लिए वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य की धूल, कचरा जलाना और सर्दियों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है। अक्टूबर-नवंबर में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के NCR इलाकों में पराली जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है। सरकार के अनुसार 2021 में गठित CAQM अब तक 101 स्टैचुटरी डायरेक्शन और 17 एडवाइजरी जारी कर चुका है। आंकड़ों की तुलना में 2016 के मुकाबले सुधार का दावा भी किया गया है—‘गुड’ और उससे बेहतर स्तर वाले दिन 110 से बढ़कर 200 हुए, जबकि ‘वेरी पुअर’ दिन 99 से घटकर 71 और ‘सीवियर’ दिन 25 से घटकर 8 रह गए। हालांकि, 165 दिन खराब हवा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्लीवासियों को लगातार साफ हवा कब मिलेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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