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पूर्व राज्यपाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रख्यात शिक्षाविद डी.वाई. पाटिल का मंगलवार को 92 वर्ष की उम्र में महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। डी.वाई. पाटिल ने 1967 में विधायक के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और बाद में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने डी.वाई. पाटिल विश्वविद्यालय की स्थापना की और उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने त्रिपुरा और बिहार के राज्यपाल के रूप में सेवा दी, जबकि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।
डी.वाई. पाटिल के निधन पर देशभर के राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर है। कई नेताओं ने उन्हें दूरदर्शी शिक्षाविद, समाजसेवी और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत अनेक नेताओं ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और उनका प्रेरणादायी जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बना रहेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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