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देश में पेपर लीक की घटनाएं अब किसी एक राज्य या परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई हैं। वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक मीडिया रिपोर्टों और सरकारी कार्रवाई के आधार पर कम से कम 116 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए। इस दौरान पेपर माफिया का नेटवर्क 19 राज्यों तक फैला मिला। आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2024 के बीच 89 पेपर लीक के मामले दर्ज हुए, जिनमें 21 केंद्रीय और 68 राज्य स्तरीय परीक्षाएं शामिल थीं।
इसके बाद 2025 में 20 और 2026 में जुलाई तक नीट-यूजी समेत 7 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए। सबसे अधिक असर शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर पड़ा, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। लगातार सामने आ रहे मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अभ्यर्थियों में वर्षों से जमा नाराजगी को और बढ़ा दिया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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