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मध्य प्रदेश में सरकारी खर्च की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य शासन के विभिन्न विभागों ने वर्ष 2024-25 तक विभिन्न विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए निकाले गए ₹60,113 करोड़ के 81 हजार से अधिक उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilization Certificates) जमा नहीं किए हैं। कैग के अनुसार, यह वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है जो राज्य के कमजोर आंतरिक नियंत्रण और निगरानी तंत्र को उजागर करता है। बकाया प्रमाण-पत्रों में पंचायती राज, सामाजिक न्याय, और ग्रामीण विकास जैसे मुख्य विभाग सबसे आगे हैं, जहाँ सामाजिक न्याय विभाग में तो ₹53 करोड़ के खर्च के मुकाबले महज ₹5 लाख का प्रमाण-पत्र पेश किया गया।
उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत न करने से न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन का जोखिम बढ़ जाता है, बल्कि इससे लाभार्थियों तक सहायता पहुँचने में भी संशय बना रहता है। कैग ने चेतावनी दी है कि पुराने खर्च का ब्योरा न मिलने की स्थिति में केंद्र सरकार से मिलने वाला आगामी अनुदान और किस्तें रुक सकती हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण योजनाएं और संस्थागत बजट प्रभावित हो सकते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कैग ने राज्य सरकार को त्वरित जांच करने, देरी के कारणों की पहचान करने और एक कठोर निगरानी व्यवस्था स्थापित करने की सिफारिश की है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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