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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत आगर में आने वाले तीन गांव—खेजड़-खो, हाथिया-खो और जामुन का पुरा—आज भी विकास की बुनियादी राह देख रहे हैं। लगभग छह हजार की आबादी वाले ये गांव हर चुनाव में मतदान तो करते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि ये आज तक सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो सके हैं। पहचान न होने के कारण यहाँ के ग्रामीण सड़क, सुरक्षित स्कूल भवन और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। बारिश का मौसम आते ही लगभग चार किलोमीटर का कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
रास्तों की बदहाली के कारण आपात स्थिति में गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुँच पाती, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई (खाट) पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इसके अलावा, प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर होने से बच्चों की नियमित पढ़ाई पिछले एक साल से प्रभावित है और बारिश में रास्ते बंद होने से शिक्षा पूरी तरह ठप हो जाती है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने के बावजूद समस्या का हल न निकलने से ग्रामीणों में भारी निराशा है; उनकी सबसे पहली मांग इन गांवों को राजस्व रिकॉर्ड में शामिल कराकर पक्की सड़क व मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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