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भारत समेत दुनिया के कई देशों पर इस साल के अंत तक 'सुपर एल नीनो' का खतरा मंडरा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसके प्रभाव से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे सामान्य से कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है। इसका सबसे अधिक असर धान सहित खरीफ फसलों की बुआई और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य औसत का लगभग 90 प्रतिशत ही वर्षा होने का अनुमान जताया है।
'सुपर एल नीनो' के दौरान प्रशांत महासागर का सतही तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ जाता है, जिससे वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है। भारत में इसका सीधा असर मानसून पर पड़ता है और बारिश में कमी से खेती, जल संसाधन और खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के न्यूट्रल रहने की संभावना है, जिससे एल नीनो के प्रभाव को संतुलित करने वाली प्राकृतिक मदद नहीं मिल पाएगी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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