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मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि 7,165 करोड़ रुपये से अधिक के बजट के बावजूद प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूल बिना एक भी शिक्षक के संचालित हो रहे हैं। वहीं 435 ऐसे स्कूल हैं, जहां कोई छात्र नहीं है, लेकिन शिक्षक पदस्थ हैं। हाईकोर्ट ने इसे बच्चों के शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच 66,814 सरकारी स्कूलों के ऑडिट में कई अनियमितताएं सामने आईं। 85 स्कूलों में स्वीकृत पद न होने के बावजूद 128 शिक्षकों को वेतन दिया गया, जबकि शिक्षक प्रशिक्षण के लिए निर्धारित 7,165.09 करोड़ रुपये में से पांच वर्षों में केवल 35.71 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में 28.32% शिक्षक पद खाली हैं और शिक्षा व्यवस्था की इस कमी का असर परीक्षा परिणामों पर भी पड़ा, जहां हाई स्कूल का पास प्रतिशत 67.74% से घटकर 38.53% रह गया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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