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इंदौर में आयोजित IgG4 रिलेटेड डिजीज 2026 कॉन्फ्रेंस में भारत, जापान, इटली सहित कई देशों के विशेषज्ञों ने दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी IgG4-Related Disease के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि शरीर में बनने वाली हर गांठ या ट्यूमर कैंसर का संकेत नहीं होती, बल्कि कई मामलों में यह IgG4 जैसी बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। सम्मेलन में 350 से अधिक डॉक्टरों और 20 से ज्यादा विशेषज्ञों ने बीमारी की पहचान, जांच और आधुनिक उपचार पर चर्चा की। इस दौरान 50 से अधिक शोध पत्र और केस स्टडी प्रस्तुत किए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी है और आंख, पैंक्रियाज, किडनी, हृदय, लार ग्रंथियों समेत शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। मरीजों में सूजन, गांठ और अंगों में फाइब्रोसिस जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जबकि लक्षण विकसित होने में 6 से 8 महीने तक का समय लग सकता है। डॉक्टरों ने सलाह दी कि यदि किसी एक अंग में IgG4 बीमारी की पुष्टि हो, तो अन्य अंगों की भी जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान होने पर स्टेरॉयड, इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं और बायोलॉजिकल थेरेपी से प्रभावी उपचार संभव है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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