Dalai Lama Birthday: भारत में क्यों हैं दलाई लामा इतने लोकप्रिय? जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता 14वें दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु और विश्वभर में शांति, करुणा तथा अहिंसा के प्रतीक माने जाते हैं। वर्ष 1959 में तिब्बत छोड़कर भारत आने के बाद से वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। भारत ने उन्हें और हजारों तिब्बती शरणार्थियों को आश्रय दिया, जिसके कारण भारतीय समाज में उनके प्रति गहरा सम्मान है। उन्हें प्राचीन नालंदा बौद्ध परंपरा के संरक्षण और भारतीय बौद्ध दर्शन को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने का श्रेय भी दिया जाता है।
दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के तकस्टर गांव में ल्हामो थोंडुप के रूप में हुआ था। मात्र दो वर्ष की आयु में उन्हें 13वें दलाई लामा का पुनर्जन्म माना गया और बाद में तेनजिन ग्यात्सो के नाम से तिब्बत के आध्यात्मिक एवं लौकिक नेता के रूप में स्थापित किया गया। वर्ष 1989 में उन्हें शांति, अहिंसा और मानवाधिकारों के प्रति उनके योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। तिब्बती परंपरा में उन्हें करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर का अवतार माना जाता है।
उनके 91वें जन्मदिन के अवसर पर शिमला के दोरजे ड्रेक मठ सहित भारत और दुनिया के कई हिस्सों में विशेष प्रार्थनाएं और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके शांति और करुणा के संदेश को पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक बताया। स्वास्थ्य कारणों से इस वर्ष वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सके, लेकिन उनके अनुयायियों ने उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।