Advertisement
मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर काम तेज कर दिया है। इसके तहत सबसे अधिक जाम वाले क्षेत्रों में एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा को शामिल किया गया है। जबलपुर में एक कॉरिडोर बनकर तैयार हो चुका है, जबकि भोपाल और ग्वालियर में निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
इन परियोजनाओं की योजना वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर तैयार की जा रही है। विभाग प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या, पीक ऑवर में ट्रैफिक की स्थिति, सड़क की क्षमता, दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड और भविष्य के यातायात का आकलन कर रहा है। खास बात यह है कि गूगल मैप से ट्रैफिक डेटा लेकर पीक ऑवर का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे कॉरिडोर का लेआउट और डिजाइन अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
राज्य के विभिन्न शहरों में करोड़ों रुपये की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। भोपाल में 3.7 किमी, इंदौर में 7.44 किमी, उज्जैन में 5.32 किमी और ग्वालियर में 13.3 किमी लंबे कॉरिडोर पर काम चल रहा है, जबकि रीवा के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इन परियोजनाओं का डिजाइन ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता से तैयार कराया जा रहा है, जिसमें रोड सेफ्टी और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों का विशेष ध्यान रखा गया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |