Advertisement
मध्य प्रदेश सरकार शहरी विकास के लिए भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अब अधिकांश क्षेत्रों में भूमि और भवनों के मिश्रित उपयोग (कम्बाइंड लैंड यूज) की अनुमति दी जाएगी। यानी आवासीय क्षेत्रों में भी निर्धारित शर्तों के तहत व्यावसायिक और कुछ गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। यह व्यवस्था हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल दोनों प्रकार के विकास पर लागू होगी। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक भूमि उपयोग श्रेणी में कुछ गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी, जैसे आवासीय क्षेत्रों में प्रदूषणकारी उद्योग, गोदाम, बूचड़खाने, कबाड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, बड़े परिवहन टर्मिनल और पशुपालन से जुड़ी कुछ व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भूमि विकास नियमों में संशोधन का मसौदा जारी कर 15 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। नए प्रस्ताव में किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब भूखंड विकास, फ्लैट और समूह आवास परियोजनाओं के साथ-साथ एकल स्वामित्व वाले भूखंडों पर ऊर्ध्वाधर विस्तार (वर्टिकल एक्सपेंशन) की अनुमति भी दी जाएगी। इसके अलावा प्रति हेक्टेयर आवासीय इकाइयों की अधिकतम सीमा समाप्त करने का प्रस्ताव है, जिससे उपलब्ध भूमि के अनुसार अधिक संख्या में मकानों और हाईराइज इमारतों का निर्माण संभव हो सकेगा।
संशोधित नियमों में विभिन्न भूमि उपयोग क्षेत्रों के लिए प्रतिबंधित गतिविधियों की अलग-अलग सूची भी तय की गई है। वाणिज्यिक क्षेत्रों में भारी उद्योग और विस्फोटक सामग्री का भंडारण प्रतिबंधित रहेगा, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में पूर्ण आवासीय टाउनशिप, स्कूल और कुछ संवेदनशील संस्थानों की अनुमति नहीं होगी। कृषि भूमि पर बड़े मॉल, शहरी व्यावसायिक परिसर और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर रोक रहेगी। वहीं जलाशयों और तालाब क्षेत्रों में निर्माण, अतिक्रमण, औद्योगिक अपशिष्ट, खनन और अन्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से शहरी विकास को गति मिलेगी, आवास निर्माण बढ़ेगा और भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |