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बिहार सरकार ने पटना के बांसघाट स्थित अत्याधुनिक श्मशान घाट के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी सद्गुरु जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन (ईशा आउटरीच) को पांच वर्षों के लिए 1 रुपये की टोकन लीज पर सौंप दी है। करीब 89.40 करोड़ रुपये की लागत से बने इस श्मशान घाट में एसी वेटिंग हॉल, गंगाजल के तालाब और एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा बिहार कैबिनेट ने मुंगेर के तेलडीहा मंदिर के पास लगभग 15 से 17 एकड़ सरकारी जमीन भी ईशा फाउंडेशन को 99 वर्षों की लीज पर 1 रुपये में देने को मंजूरी दी है।
नई व्यवस्था के तहत बांसघाट में अंतिम संस्कार के लिए 3,500 से 5,000 रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि कुछ विशेष सुविधाओं के साथ यह राशि 10,000 रुपये तक पहुंच सकती है। इसी शुल्क को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकारी धन से विकसित सार्वजनिक सुविधा को निजी संस्था को सौंपने से आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जबकि पहले सरकारी श्मशान घाटों में बहुत कम खर्च में अंतिम संस्कार हो जाता था।
वहीं सरकार और ईशा फाउंडेशन का कहना है कि यह व्यवस्था तमिलनाडु में पहले से सफलतापूर्वक लागू मॉडल पर आधारित है, जहां संस्था 33 से अधिक श्मशान घाटों का संचालन कर रही है। उनका दावा है कि आधुनिक और प्रदूषण मुक्त अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध कराना, परिजनों को सम्मानजनक वातावरण देना और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करना इस पहल का उद्देश्य है। साथ ही, फाउंडेशन का कहना है कि तमिलनाडु में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले परिवारों को निशुल्क सेवाएं भी दी जाती हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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