Advertisement
भोपाल में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन अधिकारियों के कामकाज को लेकर सख्त नजर आए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने और विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिवों ने पिछड़े प्रदर्शन वाले जिलों के कलेक्टरों, कमिश्नरों और पुलिस अधीक्षकों से कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों को लेकर जवाब-तलब किया। इंदौर में एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के इलाज की कम प्रगति पर जब स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से सवाल किया तो उनके जवाब से असंतुष्ट मुख्य सचिव ने बीच में टोकते हुए कहा, "पहले सवाल सुनो, फिर जवाब दो। जो पूछा जा रहा है, उसी का सटीक जवाब दीजिए।"
बैठक में कानून-व्यवस्था और विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के दौरान कई जिलों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए गए। रीवा जिले को तय समय सीमा में चालान पेश करने में सबसे पीछे बताया गया, जिस पर मुख्य सचिव ने एसपी को 60 और 90 दिन की समयसीमा का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। वहीं भोपाल में स्कूलों में कम नामांकन और अधिक ड्रॉपआउट दर पर भी चिंता जताई गई। सीएस ने भोपाल कलेक्टर से कारण पूछते हुए सुधारात्मक कदम तत्काल लागू करने के निर्देश दिए। इसके अलावा एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के उपचार में भोपाल, सिंगरौली और इंदौर के खराब प्रदर्शन पर भी अधिकारियों से जवाब मांगा गया।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वीडियो कॉन्फ्रेंस और समीक्षा बैठकों को पूरी गंभीरता से लें तथा तथ्यों के आधार पर सटीक जवाब दें। उन्होंने भूमि अधिग्रहण के मामलों का शीघ्र निपटारा, पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, कुत्तों के काटने की घटनाओं की नियमित समीक्षा, अवैध उत्खनन पर सख्त कार्रवाई, ई-साक्ष्य संग्रह बढ़ाने, नशामुक्त मध्य प्रदेश अभियान को तेज करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस करने को कहा। साथ ही पिछड़े जिलों के लिए नई समय-सीमा तय कर जल्द परिणाम देने के निर्देश भी दिए।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |