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राजधानी भोपाल में नई हाउसिंग पॉलिसी के तहत इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इन आधुनिक मिनी सिटीज में लोगों को एक ही परिसर में आवास, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, मार्केट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाली ये टाउनशिप छोटे उपनगरों की तर्ज पर बनाई जाएंगी, ताकि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। सरकार का उद्देश्य बेहतर शहरी नियोजन के साथ व्यवस्थित और आत्मनिर्भर आवासीय क्षेत्र विकसित करना है।
भोपाल में भौंरी, नरसिंहगढ़ रोड और कोलार के कजलीखेड़ा क्षेत्र में इस परियोजना पर काम शुरू होने जा रहा है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) विभाग ने अब तक छह डेवलपर्स का पंजीयन किया है, जबकि सात अन्य एजेंसियों के आवेदन प्रक्रिया में हैं। फिलहाल पंजीकृत कंपनियां इंदौर की हैं, लेकिन उन्हें प्रदेश के किसी भी जिले में इस नीति के तहत टाउनशिप विकसित करने की अनुमति होगी। इन क्षेत्रों का चयन बेहतर सड़क संपर्क और भविष्य में अयोध्या बायपास के दस लेन विस्तार जैसी आधारभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
नई नीति के तहत डेवलपर्स मनमाने ढंग से परियोजना विकसित नहीं कर सकेंगे। प्रत्येक प्रोजेक्ट की निगरानी कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति करेगी और हर तीन महीने में उसकी समीक्षा होगी। अंतिम मंजूरी मिलने के छह माह के भीतर निर्माण कार्य शुरू करना अनिवार्य होगा। इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए न्यूनतम 40 हेक्टेयर भूमि और राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग अथवा कम से कम 30 मीटर चौड़ी सड़क से सीधी कनेक्टिविटी जरूरी होगी। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से शहरों पर बढ़ता दबाव कम होगा और नागरिकों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त सुव्यवस्थित आवासीय क्षेत्र मिल सकेंगे।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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